Tuesday, 15 April 2014

1. गरीब बाप की बेटी और दहेज़

                  रजनी गरीब थी | उसका ब्याह हो गया | दहेज़ कम दिया गया   था ,फिर भी रजनी अपने सशुराल सकुशल पहुच गयी | बचपन की प्यारी यादो   को छोड़ कर रजनी ने अपने नए घर में पदार्पण किया | शुरू के दिनों में रजनी के सशुराल वालो का व्यवहार ठीक-ठाक था,किन्तु जैसे-जैसे समय बीतता गया ,रजनी के प्रति उसके सशुराल वालो का बर्ताव बदलने लगा |उसकी सासु माँ तो जैसे उसके पीछे ही पड़ गयी थी ,तनिक-तनिक बात में हमेशा उसे फटकारती  रहती थी | उसका पति भी उससे सीधे मुह बात नहीं करता था | परिवार में    रजनी की अवहेलना होने लगी | इस तरह एक साल गुजर गए | हमेशा खुश   रहने वाली रजनी की चहरे पर अब दुःख और विषाद की रेखाएं देती थी |
                   एक दिन सुबह घर के लोग बड़े प्रसन्न दिखाइ दे रहे थे | आज रजनी को किसीने नहीं डाटा | उसका पति भी आज उससे प्रेम जता रहा था | रजनी को अपने घर वालो के इस बदले रंग को देख कर हैरानी होने लगी थी |   शाम को खूब लजीज खाना बना | आज रजनी की पति ने उसे अपनी हाथो से खिलाया | खाना खाकर रजनी सो गयी ,और फिर कभी नहीं उठी | ये उसकी जिंदगी की आख़िरी रात थी,क्योकि उसका गरीब बाप अपने दामाद को दहेज़    में मोटरसाइकिल नहीं दे सका था |
                                   "  लघु कथा"