रजनी गरीब थी |
उसका ब्याह हो गया | दहेज़ कम दिया गया था ,फिर भी रजनी अपने सशुराल
सकुशल पहुच गयी | बचपन की प्यारी यादो को छोड़ कर रजनी ने अपने नए घर में पदार्पण किया
| शुरू के दिनों में रजनी के सशुराल वालो का व्यवहार ठीक-ठाक
था,किन्तु जैसे-जैसे समय बीतता गया ,रजनी
के प्रति उसके सशुराल वालो का बर्ताव बदलने लगा |उसकी सासु माँ
तो जैसे उसके पीछे ही पड़ गयी थी ,तनिक-तनिक बात में हमेशा उसे
फटकारती रहती थी | उसका
पति भी उससे सीधे मुह बात नहीं करता था | परिवार में रजनी की अवहेलना होने लगी | इस तरह एक साल गुजर गए | हमेशा खुश रहने वाली रजनी की चहरे पर अब दुःख और विषाद की
रेखाएं देती थी |
एक दिन सुबह घर के लोग बड़े प्रसन्न
दिखाइ दे रहे थे | आज रजनी को किसीने नहीं डाटा | उसका पति भी आज उससे प्रेम जता रहा था | रजनी को अपने
घर वालो के इस बदले रंग को देख कर हैरानी होने लगी थी | शाम को खूब लजीज खाना बना |
आज रजनी की पति ने उसे अपनी हाथो से खिलाया | खाना
खाकर रजनी सो गयी ,और फिर कभी नहीं उठी | ये उसकी जिंदगी की आख़िरी रात थी,क्योकि उसका गरीब बाप
अपने दामाद को दहेज़ में मोटरसाइकिल नहीं
दे सका था |
" लघु कथा"
" लघु कथा"
No comments:
Post a Comment